शुभ विवाह मुहूर्त २०२७ - महिन्यानुसार लग्नाच्या शुभ तारखा
२०२७ मधील सर्व ९५ शुभ विवाह मुहूर्त - महिन्यानुसार तारखा, नक्षत्र आणि पुण्याच्या वेळा, तसेच जुलै ते १० नोव्हेंबरदरम्यान मुहूर्त का नाहीत याचे कारण.
Raj Patil · संस्थापक, विवाह स्वप्न
राज पाटील हे विवाह स्वप्नचे संस्थापक आहेत. ते स्थळ जुळवणी, प्रभावी मॅट्रिमोनी प्रोफाइल आणि महाराष्ट्रीय विवाह परंपरांविषयी लिहितात.
दृक पंचांगाच्या पुण्यासाठीच्या गणनेनुसार २०२७ मध्ये लग्नाचे ९५ शुभ मुहूर्त आहेत. सर्वाधिक मुहूर्त मे महिन्यात (१९), त्यानंतर जून (१६) आणि फेब्रुवारी (१३). १३ जुलै ते ९ नोव्हेंबर या काळात एकही विवाह मुहूर्त नाही, कारण १४ जुलैच्या देवशयनी (आषाढी) एकादशीपासून १० नोव्हेंबरच्या प्रबोधिनी (कार्तिकी) एकादशीपर्यंत चातुर्मास आहे. १५ मार्च ते १७ एप्रिल (सूर्याचा मीन राशीतील महिना) आणि १४ डिसेंबरनंतर (सूर्य धनु राशीत जातो) या काळातही मुहूर्त नाहीत. ही यादी नियोजनासाठी वापरा, पण तारीख पक्की करण्याआधी तुमच्या पंचांगावरून आणि दोघांच्या पत्रिकांवरून गुरुजींकडून खात्री करून घ्या.
लग्न ठरले की दोन्ही घरांचा पहिला प्रश्न असतो - लग्न कधी करायचे? खाली २०२७ मधील प्रत्येक तारीख नक्षत्र आणि मुहूर्ताच्या वेळेसह दिली आहे. त्यानंतर काही महिन्यांत मुहूर्त का नसतात आणि मराठी पंचांगे या यादीशी कितपत जुळतात, तेही सांगितले आहे.
शुभ विवाह मुहूर्त २०२७ - एका नजरेत
| महिना | लग्नाच्या तारखा | दिवस |
|---|---|---|
| जानेवारी | १५, १८, १९, २०, २४, २६, २७, ३०, ३१ | ९ |
| फेब्रुवारी | २, ३, ९, १०, ११, १४, १५, २१, २२, २५, २६, २७, २८ | १३ |
| मार्च | १, २, ३, ४, ९, १०, १४ | ७ |
| एप्रिल | १८, १९, २१, २३, २४, २५, २६, २७, २८ | ९ |
| मे | ४, ७, ८, ९, १३, १४, १५, १६, १७, १८, १९, २०, २१, २२, २३, २४, २५, ३०, ३१ | १९ |
| जून | १, ५, ९, १०, ११, १२, १३, १५, १६, १७, १९, २०, २१, २६, २७, २८ | १६ |
| जुलै | ७, ८, ९, ११, १२ | ५ |
| ऑगस्ट ते ऑक्टोबर | एकही नाही | ० |
| नोव्हेंबर | १०, ११, १५, १६, २०, २१, २३, २४, २५, २६, २९ | ११ |
| डिसेंबर | २, ७, ९, १२, १३, १४ | ६ |
अक्षय्य तृतीया रविवार, ९ मे २०२७ रोजी आहे आणि तीही या यादीत आहे.
२०२७ चे लग्न मुहूर्त - महिन्यानुसार सविस्तर
वेळा दृक पंचांगाने पुण्यासाठी दिलेल्या आहेत. महाराष्ट्रातील इतर शहरांत त्या काही मिनिटांनी पुढे-मागे होतात; नक्षत्र मात्र सगळीकडे तेच असते.
पंचांगातील दिवस एका सूर्योदयापासून पुढच्या सूर्योदयापर्यंत धरला जातो. त्यामुळे मध्यरात्रीनंतर किंवा पहाटे असलेला मुहूर्त आदल्या तारखेखाली छापला जातो. कार्यालय बुक करण्यापूर्वी वेळेचा रकाना नीट वाचा. उदाहरणार्थ, ३० जानेवारीचा मुहूर्त प्रत्यक्षात ३१ जानेवारीला पहाटे ३:५५ ते सकाळी ७:०८ असा आहे. ९ व १४ फेब्रुवारी, ३ मार्च, ८ व १६ मे, ९ व २० जून, ८ जुलै आणि २० व २९ नोव्हेंबर या तारखांचेही असेच आहे.
जानेवारी २०२७
| तारीख | वार | नक्षत्र | मुहूर्त (पुणे) |
|---|---|---|---|
| १५ जानेवारी | शुक्रवार | रेवती | सकाळी ७:१० ते दुपारी २:१३ |
| १८ जानेवारी | सोमवार | रोहिणी | रात्री ९:०५ ते रात्री ९:१२ |
| १९ जानेवारी | मंगळवार | रोहिणी, मृग | सकाळी ७:४९ ते दुसऱ्या दिवशी सकाळी ७:१० |
| २० जानेवारी | बुधवार | मृग | सकाळी ७:१० ते सायंकाळी ४:१७ |
| २४ जानेवारी | रविवार | मघा | सकाळी १०:२० ते रात्री ९:२९ |
| २६ जानेवारी | मंगळवार | उत्तरा, हस्त | रात्री ८:१८ ते दुसऱ्या दिवशी सकाळी ७:०९ |
| २७ जानेवारी | बुधवार | हस्त | सकाळी ७:०९ ते रात्री ११:५६ |
| ३० जानेवारी | शनिवार | अनुराधा | पहाटे ३:५५ ते सकाळी ७:०८ (३१ जानेवारी) |
| ३१ जानेवारी | रविवार | अनुराधा | सकाळी ७:०८ ते सायंकाळी ७:३४ |
फेब्रुवारी २०२७
| तारीख | वार | नक्षत्र | मुहूर्त (पुणे) |
|---|---|---|---|
| २ फेब्रुवारी | मंगळवार | मूळ | सायंकाळी ५:४७ ते दुसऱ्या दिवशी सकाळी ७:०८ |
| ३ फेब्रुवारी | बुधवार | मूळ | सकाळी ७:०८ ते दुपारी १२:२६ |
| ९ फेब्रुवारी | मंगळवार | उत्तरा भाद्रपदा | पहाटे ३:४० ते सकाळी ७:०५ (१० फेब्रुवारी) |
| १० फेब्रुवारी | बुधवार | उत्तरा भाद्रपदा | सकाळी ७:०५ ते दुपारी २:४५ |
| उत्तरा भाद्रपदा, रेवती | पहाटे ३:०४ ते सकाळी ७:०५ (११ फेब्रुवारी) | ||
| ११ फेब्रुवारी | गुरुवार | रेवती | सकाळी ७:०५ ते रात्री ११:३० |
| १४ फेब्रुवारी | रविवार | रोहिणी | पहाटे ४:४६ ते सकाळी ७:०३ (१५ फेब्रुवारी) |
| १५ फेब्रुवारी | सोमवार | रोहिणी | सकाळी ७:०३ ते दुपारी १२:३३ |
| २१ फेब्रुवारी | रविवार | मघा | सकाळी ११:२७ ते दुपारी १:५० |
| २२ फेब्रुवारी | सोमवार | उत्तरा | सकाळी ११:५४ ते दुसऱ्या दिवशी सकाळी ६:५८ |
| २५ फेब्रुवारी | गुरुवार | स्वाती | सकाळी ९:३२ ते दुसऱ्या दिवशी सकाळी ६:५६ |
| २६ फेब्रुवारी | शुक्रवार | स्वाती | सकाळी ६:५६ ते सकाळी १०:१३ |
| २७ फेब्रुवारी | शनिवार | अनुराधा | रात्री १०:०८ ते दुसऱ्या दिवशी सकाळी ६:५५ |
| २८ फेब्रुवारी | रविवार | अनुराधा | सकाळी ६:५५ ते दुपारी १:४७ |
मार्च २०२७
| तारीख | वार | नक्षत्र | मुहूर्त (पुणे) |
|---|---|---|---|
| १ मार्च | सोमवार | मूळ | रात्री ११:१२ ते दुसऱ्या दिवशी सकाळी ६:५३ |
| २ मार्च | मंगळवार | मूळ | सकाळी ६:५३ ते दुपारी ३:२४ |
| ३ मार्च | बुधवार | उत्तराषाढा | रात्री १:०६ ते सकाळी ६:५२ (४ मार्च) |
| ४ मार्च | गुरुवार | उत्तराषाढा | सकाळी ६:५२ ते दुसऱ्या दिवशी रात्री १:३५ |
| ९ मार्च | मंगळवार | उत्तरा भाद्रपदा | सकाळी ९:५८ ते दुसऱ्या दिवशी सकाळी ६:४७ |
| १० मार्च | बुधवार | उत्तरा भाद्रपदा, रेवती | सकाळी ६:४७ ते दुसऱ्या दिवशी पहाटे ५:१३ |
| १४ मार्च | रविवार | रोहिणी | सायंकाळी ५:१० ते दुसऱ्या दिवशी सकाळी ६:४३ |
एप्रिल २०२७
| तारीख | वार | नक्षत्र | मुहूर्त (पुणे) |
|---|---|---|---|
| १८ एप्रिल | रविवार | उत्तरा | सकाळी ६:१६ ते रात्री ९:५८ |
| १९ एप्रिल | सोमवार | हस्त | सायंकाळी ७:४४ ते दुसऱ्या दिवशी पहाटे ४:४० |
| २१ एप्रिल | बुधवार | स्वाती | सायंकाळी ४:१० ते दुसऱ्या दिवशी पहाटे ४:४३ |
| २३ एप्रिल | शुक्रवार | अनुराधा | दुपारी २:१३ ते दुपारी ३:५३ |
| अनुराधा | पहाटे ४:२० ते सकाळी ६:१२ (२४ एप्रिल) | ||
| २४ एप्रिल | शनिवार | अनुराधा | सकाळी ६:१२ ते सकाळी ६:५६ |
| २५ एप्रिल | रविवार | मूळ | दुपारी ३:३५ ते दुसऱ्या दिवशी सकाळी ६:११ |
| २६ एप्रिल | सोमवार | मूळ | सकाळी ६:११ ते सकाळी ११:२९ |
| २७ एप्रिल | मंगळवार | उत्तराषाढा | रात्री ११:१३ ते दुसऱ्या दिवशी सकाळी ६:०९ |
| २८ एप्रिल | बुधवार | उत्तराषाढा | सकाळी ६:०९ ते सायंकाळी ५:३० |
मे २०२७
| तारीख | वार | नक्षत्र | मुहूर्त (पुणे) |
|---|---|---|---|
| ४ मे | मंगळवार | रेवती | सायंकाळी ४:१४ ते सायंकाळी ७:३० |
| ७ मे | शुक्रवार | रोहिणी | रात्री ११:४२ ते दुसऱ्या दिवशी सकाळी ६:०४ |
| ८ मे | शनिवार | मृग | रात्री २:३७ ते सकाळी ६:०३ (९ मे) |
| ९ मे | रविवार | मृग | सकाळी ६:०३ ते सायंकाळी ७:४२ |
| १३ मे | गुरुवार | मघा | सायंकाळी ७:२६ ते दुसऱ्या दिवशी सकाळी ६:०१ |
| १४ मे | शुक्रवार | मघा | सकाळी ६:०१ ते सकाळी ८:५० |
| १५ मे | शनिवार | उत्तरा | दुपारी १२:०० ते दुसऱ्या दिवशी सकाळी ६:०१ |
| १६ मे | रविवार | हस्त | रात्री २:४३ ते सकाळी ६:०० (१७ मे) |
| १७ मे | सोमवार | हस्त | सकाळी ६:०० ते सकाळी ११:२९ |
| १८ मे | मंगळवार | स्वाती | रात्री ११:५५ ते दुसऱ्या दिवशी सकाळी ६:०० |
| १९ मे | बुधवार | स्वाती | सकाळी ६:०० ते दुपारी १२:१९ |
| २० मे | गुरुवार | अनुराधा | रात्री १०:२६ ते दुसऱ्या दिवशी पहाटे ५:५९ |
| २१ मे | शुक्रवार | अनुराधा | पहाटे ५:५९ ते दुपारी २:५१ |
| २२ मे | शनिवार | मूळ | रात्री ११:२७ ते दुसऱ्या दिवशी पहाटे ५:५९ |
| २३ मे | रविवार | मूळ | पहाटे ५:५९ ते सकाळी ७:४१ |
| २४ मे | सोमवार | उत्तराषाढा | रात्री १०:०७ ते दुसऱ्या दिवशी पहाटे ५:५८ |
| २५ मे | मंगळवार | उत्तराषाढा | पहाटे ५:५८ ते दुसऱ्या दिवशी रात्री १:१२ |
| ३० मे | रविवार | उत्तरा भाद्रपदा | सकाळी ११:३२ ते रात्री ९:५४ |
| ३१ मे | सोमवार | उत्तरा भाद्रपदा, रेवती | सकाळी १०:०२ ते दुसऱ्या दिवशी पहाटे ५:५७ |
जून २०२७
| तारीख | वार | नक्षत्र | मुहूर्त (पुणे) |
|---|---|---|---|
| १ जून | मंगळवार | रेवती | पहाटे ५:५७ ते सकाळी ६:४६ |
| ५ जून | शनिवार | मृग | सकाळी ११:३५ ते दुपारी १२:१० |
| ९ जून | बुधवार | मघा | रात्री १:२६ ते पहाटे ५:५७ (१० जून) |
| १० जून | गुरुवार | मघा | पहाटे ५:५७ ते दुपारी ३:२४ |
| ११ जून | शुक्रवार | उत्तरा | सायंकाळी ५:२७ ते दुसऱ्या दिवशी पहाटे ५:५८ |
| १२ जून | शनिवार | उत्तरा | पहाटे ५:५८ ते सकाळी १०:४८ |
| १३ जून | रविवार | हस्त | सकाळी ९:०५ ते सायंकाळी ४:५९ |
| १५ जून | मंगळवार | स्वाती | सकाळी ६:४६ ते सायंकाळी ६:२३ |
| १६ जून | बुधवार | अनुराधा | सायंकाळी ७:४४ ते दुसऱ्या दिवशी पहाटे ५:५८ |
| १७ जून | गुरुवार | अनुराधा | पहाटे ५:५८ ते रात्री ९:३० |
| १९ जून | शनिवार | मूळ | सकाळी ६:१८ ते दुसऱ्या दिवशी रात्री २:१२ |
| २० जून | रविवार | उत्तराषाढा | पहाटे ५:०३ ते पहाटे ५:५९ (२१ जून) |
| २१ जून | सोमवार | उत्तराषाढा | पहाटे ५:५९ ते रात्री ११:५० |
| २६ जून | शनिवार | उत्तरा भाद्रपदा | सायंकाळी ७:२२ ते दुसऱ्या दिवशी सकाळी ६:०० |
| २७ जून | रविवार | उत्तरा भाद्रपदा, रेवती | सकाळी ६:०० ते दुसऱ्या दिवशी सकाळी ६:०१ |
| २८ जून | सोमवार | रेवती | सकाळी ६:०१ ते सकाळी ११:४५ |
जुलै २०२७
| तारीख | वार | नक्षत्र | मुहूर्त (पुणे) |
|---|---|---|---|
| ७ जुलै | बुधवार | मघा | सायंकाळी ६:४३ ते रात्री ११:५८ |
| ८ जुलै | गुरुवार | उत्तरा | रात्री १२:१८ ते सकाळी ६:०४ (९ जुलै) |
| ९ जुलै | शुक्रवार | उत्तरा | सकाळी ६:०४ ते सायंकाळी ६:१६ |
| ११ जुलै | रविवार | स्वाती | रात्री ११:०४ ते दुसऱ्या दिवशी सकाळी ६:०५ |
| १२ जुलै | सोमवार | स्वाती | सकाळी ६:०५ ते रात्री ११:५६ |
नोव्हेंबर २०२७
| तारीख | वार | नक्षत्र | मुहूर्त (पुणे) |
|---|---|---|---|
| १० नोव्हेंबर | बुधवार | उत्तरा भाद्रपदा | सकाळी ९:११ ते रात्री ११:४० |
| ११ नोव्हेंबर | गुरुवार | रेवती | रात्री १०:५७ ते दुसऱ्या दिवशी रात्री १:४२ |
| १५ नोव्हेंबर | सोमवार | रोहिणी | दुपारी ३:२१ ते दुसऱ्या दिवशी सकाळी ६:०० |
| १६ नोव्हेंबर | मंगळवार | मृग | सकाळी ६:४१ ते सायंकाळी ४:४२ |
| मृग | पहाटे ३:४१ ते पहाटे ४:४२ (१७ नोव्हेंबर) | ||
| २० नोव्हेंबर | शनिवार | मघा | पहाटे ४:४८ ते सकाळी ६:४४ (२१ नोव्हेंबर) |
| २१ नोव्हेंबर | रविवार | मघा | सकाळी ६:४४ ते सायंकाळी ७:२५ |
| २३ नोव्हेंबर | मंगळवार | उत्तरा, हस्त | दुपारी २:०८ ते दुसऱ्या दिवशी सकाळी ६:४६ |
| २४ नोव्हेंबर | बुधवार | हस्त | सकाळी ६:४६ ते सायंकाळी ६:५३ |
| २५ नोव्हेंबर | गुरुवार | स्वाती | सायंकाळी ६:१७ ते दुसऱ्या दिवशी सकाळी ६:४७ |
| २६ नोव्हेंबर | शुक्रवार | स्वाती | सकाळी ६:४७ ते सकाळी ९:४७ |
| २९ नोव्हेंबर | सोमवार | मूळ | रात्री २:१२ ते रात्री २:३० (३० नोव्हेंबर) |
डिसेंबर २०२७
| तारीख | वार | नक्षत्र | मुहूर्त (पुणे) |
|---|---|---|---|
| २ डिसेंबर | गुरुवार | उत्तराषाढा | दुपारी १:४३ ते दुसऱ्या दिवशी रात्री २:२९ |
| ७ डिसेंबर | मंगळवार | उत्तरा भाद्रपदा | दुपारी २:१५ ते दुसऱ्या दिवशी सकाळी ६:५५ |
| ९ डिसेंबर | गुरुवार | रेवती | सकाळी ६:५५ ते सकाळी ११:०८ |
| १२ डिसेंबर | रविवार | रोहिणी | सायंकाळी ४:४१ ते रात्री ११:५४ |
| १३ डिसेंबर | सोमवार | रोहिणी, मृग | सकाळी १०:४९ ते दुसऱ्या दिवशी सकाळी ६:५८ |
| १४ डिसेंबर | मंगळवार | मृग | सकाळी ६:५८ ते दुपारी १:२४ |
जानेवारी-फेब्रुवारी हा हिवाळ्यातील लग्नसराईचा भर असतो आणि उन्हाळ्यापूर्वी सर्वाधिक मुहूर्त फेब्रुवारीत आहेत. मार्चमधले मुहूर्त १४ तारखेलाच संपतात आणि एप्रिलमध्ये ते १८ तारखेपासून पुन्हा सुरू होतात. २०२७ मध्ये मे आणि जून हे सर्वात गर्दीचे महिने आहेत. पुण्यात मे महिन्यात लग्न करायचे असेल तर कार्यालयासाठी चढाओढ असेल, आणि उकाड्यामुळे संध्याकाळचा मुहूर्त सोयीचा ठरेल हे लक्षात ठेवा.
२०२७ मध्ये काही महिन्यांत मुहूर्त का नाहीत?
यादीतील रिकाम्या जागा योगायोगाने आलेल्या नाहीत. प्रत्येकामागे पंचांगात दाखवता येईल असे कारण आहे.
- धनु (१ ते १४ जानेवारी आणि १६ डिसेंबरपासून). सूर्य १६ डिसेंबर २०२६ ते १४ जानेवारी २०२७ आणि पुन्हा १६ डिसेंबर २०२७ पासून धनु राशीत आहे. अनेक पंचांगे याला खरमास किंवा धनुर्मास म्हणतात आणि या काळात विवाह मुहूर्त देत नाहीत. म्हणूनच वर्षाचा पहिला मुहूर्त १५ जानेवारीला आहे.
- मीन (१५ मार्च ते १३ एप्रिल). सूर्य १५ मार्च ते १४ एप्रिल मीन राशीत आहे, आणि दृक पंचांग हा सौरमास विवाहासाठी वर्ज्य मानते. सूर्य मेष राशीत गेल्यावर मुहूर्त पुन्हा सुरू होतात; दृक पंचांगाच्या यादीत एप्रिलचा पहिला मुहूर्त १८ तारखेला आहे.
- चातुर्मास (१४ जुलै ते १० नोव्हेंबर). देवशयनी (आषाढी) एकादशी १४ जुलै २०२७ ला आणि प्रबोधिनी (कार्तिकी) एकादशी १० नोव्हेंबर २०२७ ला आहे. ११ नोव्हेंबरपासून तुळशीचे लग्न सुरू होते आणि नोव्हेंबरच्या मुहूर्तांनी नवी लग्नसराई सुरू होते.
- शुक्र आणि गुरूचा अस्त. दृक पंचांगानुसार २१ जुलै ते ४ सप्टेंबर २०२७ शुक्र अस्त आहे आणि ८ ते १२ सप्टेंबर गुरू अस्त आहे. यंदा दोन्ही अस्त चातुर्मासातच येत असल्याने त्यामुळे वेगळे मुहूर्त कमी होत नाहीत. शुक्राच्या अस्ताआधीचे आणि उदयानंतरचे काही दिवसही दृक पंचांग टाळते.
- अधिक मास नाही. २०२७ मध्ये अधिक मास नाही. २०२६ मध्ये अधिक ज्येष्ठ होता आणि पुढचा अधिक मास २०२९ मध्ये आहे.
२०२७ हे सिंहस्थाचे वर्ष
गुरू साधारण २५ जानेवारी २०२७ पर्यंत आणि पुन्हा साधारण २६ जून ते २६ नोव्हेंबर २०२७ या काळात सिंह राशीत आहे. हाच नाशिक-त्र्यंबकेश्वरच्या कुंभमेळ्याचा सिंहस्थ असून त्याची मुख्य पर्वस्नाने ऑगस्ट-सप्टेंबर २०२७ मध्ये आहेत.
काही ज्योतिषी सिंहस्थ गुरू विवाहासाठी प्रतिकूल मानतात. दृक पंचांग मात्र आपल्या विवाह गणनेत सिंहस्थाचा विचार करत नाही, असे स्पष्ट सांगते. त्यामुळे वरील यादीत हा नियम लावलेला नाही. तुमचे कुटुंब किंवा गुरुजी हा नियम पाळत असतील, तर १५ ते २४ जानेवारी, २६ जून ते १२ जुलै आणि १० ते २६ नोव्हेंबर या तारखांबद्दल प्रश्न येऊ शकतो. यातली तारीख बुक करण्याआधी नक्की विचारून घ्या.
ही यादी कोणत्या पंचांगानुसार आहे?
वरच्या तारखा दृक पंचांगाने पुण्यासाठी काढलेले विवाह मुहूर्त आहेत. आम्ही त्या दृक पंचांगाच्याच नवी दिल्लीच्या यादीशी ताडून पाहिल्या. फरक एखाद-दुसऱ्या दिवसाचाच आहे (दिल्लीच्या यादीत १ जुलै आणि ८ डिसेंबर आहेत, ८ मे नाही). शिवाय प्रत्येक तारखेचे नक्षत्र आम्ही स्वतंत्र खगोलशास्त्रीय गणनेनेही तपासले. प्रत्येक तारीख विवाहासाठी मानल्या जाणाऱ्या अकरा नक्षत्रांपैकी एकात येते.
तरीही ही एकमेव यादी नाही. दाते, कालनिर्णय यांसारखी मराठी पंचांगे आपापल्या नियमांनुसार छापील आवृत्तीत मुहूर्त देतात आणि त्यांच्या तारखा यापेक्षा वेगळ्या असू शकतात. एक ठळक उदाहरण: कालनिर्णयच्या संकेतस्थळावर ऑक्टोबर २०२६ मधले विवाह मुहूर्त दिलेले आहेत, जो त्या वर्षीच्या चातुर्मासाचा काळ आहे; दृक पंचांग या काळात एकही मुहूर्त देत नाही. दिवसाचा मुहूर्त गैरसोयीचा असेल तेव्हा अनेक मराठी घरांत सायंकाळचा गोरज मुहूर्त घेतला जातो. शेवटी तुमचे गुरुजी जे पंचांग पाहतात, तेच निर्णायक.
या यादीत काय बदलले
या लेखाच्या आधीच्या आवृत्तीत मार्च ते जूनदरम्यानच्या काही तारखा चुकीच्या होत्या. ८ मार्च आणि ४ जून या दिवशी अमावास्या आहे, तर १७ एप्रिल, २९ मे, ७ जून, १४ जून आणि १८ जून या दिवशी चंद्र विवाहासाठी न घेतल्या जाणाऱ्या नक्षत्रात आहे. या तारखा काढून टाकल्या आहेत. पंचांगात असूनही यादीतून सुटलेल्या तारखा - २, ३, ४, १० व १४ मार्च, २१, २६ व २८ एप्रिल, १७, १९, २१ व २३ मे आणि जूनमधल्या बहुतेक तारखा - जोडल्या आहेत. जुलै, नोव्हेंबर आणि डिसेंबरचे मुहूर्तही आता पूर्ण दिले आहेत. "नवरात्रीनंतर लग्नसराई सुरू होते" हे विधानही चुकीचे होते: २०२७ मध्ये चातुर्मासानंतरचा पहिला मुहूर्त १० नोव्हेंबरला आहे.
विवाह मुहूर्त कसा ठरतो?
मुहूर्त म्हणजे सोयीचा शनिवार-रविवार निवडणे नव्हे. गुरुजी आधी पंचांगाची पाच अंगे पाहतात आणि मग वधू-वरांच्या पत्रिका.
१. नक्षत्र. याला सर्वाधिक महत्त्व असते. रोहिणी, मृग, मघा, उत्तरा (फाल्गुनी), हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूळ, उत्तराषाढा, उत्तरा भाद्रपदा आणि रेवती ही अकरा नक्षत्रे विवाहासाठी घेतली जातात. वरील प्रत्येक तारीख यांपैकी एका नक्षत्रात आहे. २. सौरमास. सूर्य कोणत्या राशीत आहे यावरून वर्षातले मोठे टप्पे वगळले जातात, हे वर सांगितलेच आहे. ३. तिथी. काही तिथी अधिक शुभ मानल्या जातात आणि अमावास्या टाळली जाते. ४. योग आणि करण. नक्षत्र चांगले असूनही काही योग आणि करण असताना मुहूर्त दिला जात नाही. ५. वार. परंपरेने सोमवार, बुधवार, गुरुवार आणि शुक्रवार अधिक पसंत केले जातात; प्रत्यक्षात शनिवार-रविवारचे मुहूर्तही खूप घेतले जातात. उदाहरणार्थ, दृक पंचांग आपल्या गणनेत तिथी आणि वाराला नक्षत्रापेक्षा कमी वजन देते.
यानंतर गुरुजी निवडलेला दिवस वधू आणि वर दोघांच्या पत्रिकेला अनुकूल आहे का ते पाहतात. ही पायरी गुणमेलनापेक्षा वेगळी आहे; गुणमेलनात दोन पत्रिका एकमेकींशी जुळवल्या जातात. त्याबद्दल कुंडली जुळवणी आणि ३६ गुण मिलन या लेखात सविस्तर लिहिले आहे.
मुहूर्तानुसार लग्नाचे नियोजन
- तारीख ठरताच कार्यालय आणि केटरर बुक करा. मे, फेब्रुवारी आणि नोव्हेंबरच्या शेवटच्या आठवड्यांतल्या तारखा, विशेषतः पुणे, मुंबई आणि नाशिकमध्ये, सर्वात आधी संपतात.
- दोन-तीन पर्यायी तारखा तयार ठेवा. पत्रिका, एखाद्या नातेवाइकाचा प्रवास किंवा हवे ते कार्यालय यांमुळे पहिली तारीख जमेलच असे नाही.
- ऋतू पाहून सकाळ की संध्याकाळ ठरवा. फेब्रुवारीत भर दुपारीही हवा चांगली असते. मे महिन्यात संध्याकाळचा किंवा गोरज मुहूर्त पाहुण्यांना सुसह्य ठरतो.
- नातेवाइकांना लवकर कळवा. परदेशातून येणाऱ्यांना आठवडे नव्हे, महिने लागतात.
- मधल्या काळाचा उपयोग करा. चातुर्मासात स्थळ ठरले, तर साखरपुडा, कार्यालयाचे बुकिंग आणि खरेदी लग्नसराई सुरू होण्यापूर्वी उरकता येते. हे महिने कुटुंबे कसे वापरतात ते महाराष्ट्रातील लग्नसराई या लेखात आहे, आणि महिन्यानुसार कामांची यादी लग्नाच्या तयारीची चेकलिस्ट मध्ये आहे.
- लग्नानंतर विवाह नोंदणी करा. महाराष्ट्रात लग्नाची नोंदणी स्थानिक विवाह निबंधकाकडे करता येते. त्याची पद्धत महाराष्ट्रातील विवाह नोंदणी या लेखात दिली आहे.
वारंवार विचारले जाणारे प्रश्न
२०२७ मध्ये लग्नाचे किती मुहूर्त आहेत? दृक पंचांगाच्या पुण्याच्या यादीनुसार २०२७ मध्ये ९५ दिवस विवाह मुहूर्त आहेत: जानेवारी ९, फेब्रुवारी १३, मार्च ७, एप्रिल ९, मे १९, जून १६, जुलै ५, ऑगस्ट ते ऑक्टोबर एकही नाही, नोव्हेंबर ११ आणि डिसेंबर ६. इतर पंचांगांची एकूण संख्या थोडी वेगळी असू शकते.
२०२७ च्या चातुर्मासात लग्नाचे मुहूर्त आहेत का? दृक पंचांगाच्या यादीत नाहीत. चातुर्मास १४ जुलै ते १० नोव्हेंबर २०२७ असून त्याआधीचा शेवटचा मुहूर्त १२ जुलैला आहे. काही मराठी पंचांगे या महिन्यांतही मुहूर्त छापतात; ते घ्यायचे की नाही, हा कुटुंबाचा निर्णय आहे.
२०२७ मध्ये तुळशीच्या लग्नानंतर लग्नसराई कधी सुरू होते? प्रबोधिनी एकादशी १० नोव्हेंबर २०२७ ला आहे आणि ११ नोव्हेंबरपासून तुळशीचे लग्न. नव्या लग्नसराईचे पहिले मुहूर्त १०, ११, १५ आणि १६ नोव्हेंबरला आहेत. लग्नसराई तुळशी विवाहानेच का सुरू होते, हे तुळशी विवाह या लेखात वाचा.
अक्षय्य तृतीया २०२७ ला लग्न करता येईल का? अक्षय्य तृतीया रविवार, ९ मे २०२७ रोजी आहे. अनेक कुटुंबे हा दिवस स्वतःच शुभ मानतात, आणि दृक पंचांगाच्या यादीतही तो आहे - पुण्यात सकाळी ६:०३ ते सायंकाळी ७:४२ असा मुहूर्त आहे.
२०२७ मध्ये शनिवार-रविवारचे मुहूर्त कोणते? शनिवार: ३० जानेवारी, २७ फेब्रुवारी, २४ एप्रिल, ८, १५ व २२ मे, ५, १२, १९ व २६ जून आणि २० नोव्हेंबर. रविवार: २४ व ३१ जानेवारी, १४, २१ व २८ फेब्रुवारी, १४ मार्च, १८ व २५ एप्रिल, ९, १६, २३ व ३० मे, १३, २० व २७ जून, ११ जुलै, २१ नोव्हेंबर आणि १२ डिसेंबर. यांपैकी काही दिवशी मुहूर्त रात्री किंवा सूर्योदयापूर्वी आहे, त्यामुळे वेळ नक्की पाहा.
२०२७ मध्ये अधिक मास आहे का? नाही. २०२६ मध्ये अधिक ज्येष्ठ होता. पुढचा अधिक मास २०२९ मध्ये आहे.
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अजूनही योग्य स्थळाच्या शोधात आहात?
तारीख ठरवण्याआधी जोडीदार ठरावा लागतो. तुमच्या घरात अजून शोध सुरू असेल, तर विवाह स्वप्नवर पडताळलेली मराठी प्रोफाइल्स आहेत - पुण्यातील स्थळे, मराठा समाजासाठी स्वतंत्र विभाग आणि परदेशस्थ (NRI) मराठी कुटुंबांसाठी यादीही.
महत्त्वाची सूचना: वरील तारखा दृक पंचांगाच्या पुण्यासाठीच्या गणनेवर आधारित असून केवळ मार्गदर्शनासाठी आहेत. मराठी पंचांगांसह प्रादेशिक पंचांगांत फरक असू शकतो. काहीही बुक करण्यापूर्वी तारीख आणि वेळ तुमच्या गुरुजींकडून किंवा ज्योतिषांकडून नक्की करून घ्या.

